
श्रीमती इलोरा जेना के करुणामयी नेतृत्व में सुरभि महिला मंडल की ‘प्याऊ’ पहल: सेवा, संवेदना और परोपकार का सजीव प्रतीक
🛑 इंट्रो 🛑
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भीषण ग्रीष्म की तपती दोपहर में जब धरा तप्त तवे सी दहकने लगती है, जब लू के झोंके मानो प्राणों को झुलसा देने का प्रयास करते हैं और जब एक-एक बूंद जल जीवन का अमूल्य वरदान प्रतीत होती है—ऐसे विषम समय में सुरभि महिला मंडल ने सेवा, समर्पण और करुणा की अनुपम गाथा रच दी है। नारी शक्ति की ममता, सहानुभूति और परोपकार की पावन भावना से प्रेरित यह मंडल न केवल प्यासे कंठों को तृप्त कर रहा है, बल्कि समस्त जीव-जगत के प्रति दया, प्रेम और संवेदनशीलता का दिव्य संदेश भी प्रसारित कर रहा है। यह प्रयास इस सत्य को पुनः स्थापित करता है कि जब हृदय में सेवा का दीप प्रज्वलित होता है, तब वह प्रकाश समस्त सृष्टि को आलोकित कर देता है।
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✍️ अतीक खान (बावा)
बंगवार-धनपुरी।(दैनिक जय संगवारी )
भीषण ग्रीष्म ऋतु के दाहक प्रकोप के मध्य सुरभि महिला मंडल, सोहागपुर क्षेत्र द्वारा मानवता, करुणा और संस्कृति का जो अद्वितीय समन्वय प्रस्तुत किया गया है, वह वास्तव में समाज के लिए एक अनुकरणीय आदर्श बनकर उभरा है। बंगवार भूमिगत खदान परिसर में आयोजित इस पुण्यकारी आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि सच्ची सेवा वही है, जिसमें न केवल मानव, बल्कि समस्त जीव-जगत के प्रति करुणा का भाव समाहित हो।
कार्यक्रम का शुभारंभ परम आस्था और श्रद्धा के साथ भगवान भोलेनाथ की विधिवत पूजा-अर्चना से हुआ। इस आध्यात्मिक आरंभ ने पूरे आयोजन को एक दिव्य ऊर्जा प्रदान की। पूजा उपरांत मंडल की अध्यक्षा श्रीमती इलोरा जेना ने स्वयं अपने करकमलों से वृक्षों पर स्थापित मिट्टी के पात्रों में जल भरकर प्यासे पंछी-परिंदों के लिए जीवनदायिनी व्यवस्था की। यह दृश्य मानो करुणा और सह-अस्तित्व का सजीव चित्रण था, जहां मानव और प्रकृति के मध्य संवेदना का सेतु निर्मित हो रहा था।
भारतीय संस्कृति में “जीव दया” को सर्वोच्च धर्म माना गया है। “अहिंसा परमो धर्मः” और “सर्वे भवन्तु सुखिनः” जैसे शाश्वत मंत्रों को आत्मसात करते हुए सुरभि महिला मंडल ने यह दर्शाया कि सेवा केवल मनुष्यों तक सीमित नहीं, बल्कि प्रत्येक जीव के प्रति दया और संरक्षण का भाव रखना ही सच्चा धर्म है। प्यासे पक्षियों के लिए जल की व्यवस्था करना इस बात का प्रमाण है कि यह मंडल केवल सामाजिक सेवा ही नहीं, बल्कि प्रकृति और जीव-जगत के प्रति अपनी जिम्मेदारी भी बखूबी निभा रहा है।

इसी करुणामयी भाव के साथ मंडल द्वारा ‘प्याऊ’ सेवा का शुभारंभ किया गया, जिसके अंतर्गत स्वच्छ, शीतल एवं निर्मल पेयजल की व्यवस्था विभिन्न स्थलों पर की गई। बंगवार, खैरहा, दामिनी एवं आसपास के ग्रामीण अंचलों में स्थापित ये प्याऊ केंद्र आज राहगीरों, श्रमिकों, रिक्शा चालकों और आम नागरिकों के लिए जीवनदायिनी अमृतधारा बन चुके हैं। तपती दोपहर में यह व्यवस्था किसी वरदान से कम नहीं, बल्कि मानवता के प्रति समर्पित एक जीवंत उदाहरण है।

श्रीमती इलोरा जेना का नेतृत्व इस पूरी पहल की आत्मा है। उनका व्यक्तित्व करुणा, सादगी, संवेदनशीलता और सेवा का अद्भुत संगम है। उनके मार्गदर्शन में सुरभि महिला मंडल की प्रत्येक सदस्य निस्वार्थ भाव से समाज सेवा में संलग्न है। उनकी प्रेरणा से यह मंडल केवल एक संगठन नहीं, बल्कि सेवा और संस्कारों का एक जीवंत परिवार बन गया है।
कार्यक्रम का आयोजन अत्यंत सादगी, शुचिता और सांस्कृतिक गरिमा के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर राहगीरों एवं जरूरतमंदों को खरबूजा, खीरा, ककड़ी, गुड़, चना, आम पना एवं रूह अफज़ा शरबत जैसे पारंपरिक और शीतल पेय पदार्थ वितरित किए गए। इन प्राकृतिक पदार्थों ने जहां शरीर को शीतलता प्रदान की, वहीं भारतीय संस्कृति की मधुरता और अपनत्व का भी अनुभव कराया।

इस सेवा यज्ञ में मंडल की सभी सदस्याओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। सत्त्या रामन्ना, पदमा हरिबाबू, सरजू सिंह, अनुपा सेन गुप्ता, सपना गंभीर, मंशिका मंजरी, अंजना कुर्रे, बबिता विश्वकर्मा, रंजू झा, पूनम, नर्मदा धुर्वे, शुक्रिति सिंह ठाकुर, सोनाक्षी साहू सहित अनेक महिलाओं की सक्रिय सहभागिता ने इस आयोजन को और भी प्रभावशाली बना दिया। यह सहभागिता इस बात का प्रमाण है कि जब नारी शक्ति एकजुट होकर सेवा के पथ पर अग्रसर होती है, तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन निश्चित होता है।

सुरभि महिला मंडल का यह प्रयास केवल एक दिवस तक सीमित नहीं, बल्कि सतत सेवा का संकल्प है। मंडल द्वारा यह सुनिश्चित किया गया है कि ग्रीष्म ऋतु भर इन प्याऊ केंद्रों के माध्यम से निरंतर जल सेवा जारी रहेगी। यह निरंतरता इस पहल को स्थायित्व प्रदान करती है और इसे एक सशक्त सामाजिक अभियान का रूप देती है।

भारतीय शास्त्रों में कहा गया है—“परोपकाराय पुण्याय, पापाय परपीड़नम्।” इसी उच्च आदर्श को आत्मसात करते हुए सुरभि महिला मंडल ने यह सिद्ध कर दिया है कि सच्चा पुण्य वही है, जो दूसरों के कष्ट को कम करने में निहित हो। प्यासे को जल पिलाना, भूखे को अन्न देना और जीवों पर दया करना—ये सभी कार्य मानवता के सर्वोच्च स्वरूप को अभिव्यक्त करते हैं।
पंछियों की सेवा से प्रारंभ होकर ईश्वर भक्ति और तत्पश्चात मानव सेवा तक पहुंचने वाली यह पहल वास्तव में सेवा की पूर्ण परिभाषा प्रस्तुत करती है। यह आयोजन केवल एक सामाजिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि करुणा, सह-अस्तित्व और संवेदनशीलता का उत्सव है, जो समाज को यह संदेश देता है कि जीवन का वास्तविक सार दूसरों के लिए जीने में ही निहित है।

निस्संदेह, सुरभि महिला मंडल और उसकी अध्यक्षा श्रीमती इलोरा जेना का यह प्रयास समाज के लिए प्रेरणा का दीपस्तंभ है। यह पहल न केवल सेवा और परोपकार का संदेश देती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि जब महिलाएं अपनी अंतर्निहित शक्ति, ममता और संवेदनशीलता के साथ समाज के लिए कार्य करती हैं, तो वे परिवर्तन की सशक्त वाहक बन जाती हैं।

आज आवश्यकता है कि समाज का प्रत्येक वर्ग इस प्रकार के पुनीत कार्यों से प्रेरणा लेकर आगे आए और सेवा, करुणा एवं मानवता के इस पावन पथ पर अपने कदम बढ़ाए। सुरभि महिला मंडल की यह ‘प्याऊ’ पहल वास्तव में सेवा, संस्कार और समर्पण की वह अविरल धारा है, जो आने वाले समय में भी जनकल्याण के पथ को आलोकित करती रहेगी और मानवता की ज्योति को निरंतर प्रज्वलित करती रहेगी।