शोभा टाह फाउंडेशन के कन्यादान महायज्ञ में पर्यावरण सेवियों का सम्मान

श्रीमती रेखा मदन मोहन गुल्ला और भुवन वर्मा को मिला विशेष गौरव

बिलासपुर – अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर शोभा टाह फाउंडेशन द्वारा आयोजित भव्य कन्यादान महायज्ञ में जहां 11 कन्याओं का वैदिक रीति-विधान से मंगल परिणय संपन्न हुआ, वहीं सामाजिक, धार्मिक और पर्यावरण के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को सम्मानित कर कार्यक्रम को और भी गरिमामय बना दिया गया।
कार्यक्रम के विशेष आकर्षण के रूप में पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय हरिहर ऑक्सीजोन परिवार के सदस्यों को सम्मानित किया गया। इसी कड़ी में श्रीमती रेखा मदन मोहन गुल्ला एवं भुवन वर्मा को उनके निरंतर और समर्पित पर्यावरणीय कार्यों के लिए विशिष्ट रूप से सम्मानित किया गया।
यह सम्मान उन्हें प्रयागराज के पूज्य संत स्वामी बृजेशानंद महाराज के कर-कमलों से फाउंडेशन के संस्थापक श्री अनिल टाह एवं जिला न्यायाधीश हिदायत उल्ला खान की विशेष उपस्थिति में प्रदान किया गया।
अपने आशीर्वचन में स्वामी बृजेशानंद महाराज ने कहा कि
पर्यावरण संरक्षण केवल सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि यह मानव जीवन और आने वाली पीढ़ियों के अस्तित्व का आधार है। इस दिशा में कार्य करने वाले व्यक्ति वास्तव में समाज के सच्चे सेवक हैं।
वहीं शोभा टाह फाउंडेशन के संस्थापक अनिल टाह एवं जिला न्यायाधीश हिदायत उल्ला खान ने अपने उद्बोधन में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उत्कृष्ट कार्य करने वाले हरिहर आक्सीजोन संस्था की सराहना करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज के समय में वैश्विक आवश्यकता बन चुका है और इस दिशा में सभी को मिलकर समन्वित प्रयास करना जरूरी है। उन्होंने हरिहर आक्सीजोन संस्था के सभी समर्पित व्यक्तित्वों को समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया, जिनके प्रयासों से पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता को नई दिशा मिल रही है।
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ गौरव सम्मान के अंतर्गत अन्य पर्यावरण एवं समाजसेवी हस्तियों को भी सम्मानित किया गया, जिसमें स्मृति जैन वैष्णव, लता सौमित्र गुप्ता, निर्मल अग्रवाल, श्रीराम यादव एवं शिव सारथी प्रमुख रहे।
उल्लेखनीय है कि शोभा टाह फाउंडेशन द्वारा आयोजित इस महायज्ञ में हरिहर ऑक्सीजोन परिवार एवं महिला विंग का विशेष योगदान रहा, जिनके पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को मंच से सराहा गया। पूरे आयोजन ने न केवल सामाजिक समरसता का संदेश दिया, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने का भी महत्वपूर्ण कार्य किया।
इस प्रकार यह आयोजन सामाजिक, आध्यात्मिक एवं पर्यावरणीय चेतना का अद्भुत संगम बनकर उपस्थित जनसमुदाय के लिए प्रेरणादायी साबित हुआ।

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