
अर्जुनी(दैनिक जय संगवारी )आखिरकार वह हुआ जिसकी मांग लंबे समय से ग्राम टोनाटार के ग्रामीण, जनप्रतिनिधि और महिला स्वसहायता समूह कर रहे थे। गांव में अवैध महुआ शराब के कारोबार को लेकर लगातार उठ रही शिकायतों और मीडिया द्वारा प्रमुखता से प्रकाशित खबर के बाद पुलिस प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। इस कार्रवाई में एक शराब कोचिया को रंगे हाथों गिरफ्तार करते हुए उसके कब्जे से 100 लीटर अवैध महुआ शराब, शराब बनाने के उपकरण तथा अन्य सामग्री जब्त की गई है।
गौरतलब है कि कुछ दिनों पूर्व समाचार पत्र में “शराब की बिक्री से गांव का माहौल हो रहा खराब” शीर्षक से प्रकाशित खबर ने पूरे क्षेत्र का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर आकर्षित किया था। खबर में बताया गया था कि ग्राम टोनाटार में ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और भारत माता वाहिनी स्वसहायता समूह की महिलाओं के विरोध के बावजूद गांव में कई स्थानों पर खुलेआम अवैध शराब का कारोबार संचालित हो रहा है। इस अवैध धंधे के कारण गांव का सामाजिक वातावरण बिगड़ रहा था, युवाओं में नशे की प्रवृत्ति बढ़ रही थी और परिवारों में अशांति का माहौल पैदा हो रहा था।
समाचार के प्रकाशन के बाद पुलिस प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया और तत्काल सूचना तंत्र सक्रिय करते हुए अवैध शराब कारोबारियों पर नजर रखनी शुरू कर दी। इसी दौरान पुलिस को विश्वसनीय सूचना प्राप्त हुई कि ग्राम टोनाटार निवासी संतकुमार चेलक अपने घर से लगी बाड़ी में बड़े पैमाने पर महुआ शराब तैयार कर बिक्री की तैयारी कर रहा है।
सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने बिना समय गंवाए योजनाबद्ध तरीके से मौके पर दबिश दी। पुलिस के पहुंचते ही वहां मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया। जांच के दौरान आरोपी संतकुमार चेलक को अवैध रूप से महुआ शराब बनाते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया गया। पुलिस ने मौके से 100 लीटर महुआ शराब, गैस सिलेंडर, चूल्हा, पाइप, तथा शराब निर्माण में उपयोग किए जा रहे विभिन्न बर्तनों को जब्त किया।
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) सहित लागू प्रावधानों के तहत अपराध दर्ज कर मामले को विवेचना में लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अवैध शराब के कारोबार में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और क्षेत्र में लगातार निगरानी एवं कार्रवाई जारी रहेगी।
यह कार्रवाई केवल एक आरोपी की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन लोगों के लिए भी कड़ा संदेश है जो गांवों में अवैध शराब का जाल बिछाकर समाज को नशे की गिरफ्त में धकेलने का काम कर रहे हैं। वर्षों से यह देखा जा रहा है कि कुछ असामाजिक तत्व आर्थिक लाभ के लालच में ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध शराब का निर्माण और बिक्री कर रहे हैं, जिससे अनेक परिवार बर्बादी की कगार पर पहुंच जाते हैं। ऐसे तत्वों के खिलाफ समय रहते की गई कार्रवाई न केवल कानून व्यवस्था को मजबूत करती है बल्कि सामाजिक सुधार की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित होती है।
ग्रामीणों का कहना है कि टोनाटार में अवैध शराब का कारोबार लंबे समय से चिंता का विषय बना हुआ था। कई बार शिकायतें भी की गईं, लेकिन इस बार मीडिया ने जिस मजबूती के साथ मुद्दे को उठाया, उसके बाद प्रशासन की सक्रियता देखने को मिली। ग्रामीणों ने उम्मीद जताई है कि यह कार्रवाई केवल शुरुआत है और आने वाले दिनों में गांव तथा आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय अन्य शराब कोचियों पर भी इसी तरह की कठोर कार्रवाई की जाएगी।
भारत माता वाहिनी स्वसहायता समूह की महिलाओं ने भी पुलिस प्रशासन की इस कार्रवाई का स्वागत किया है। उनका कहना है कि गांव की महिलाएं लंबे समय से शराब के कारण उत्पन्न सामाजिक समस्याओं से जूझ रही थीं। नशे के कारण कई परिवारों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही थी और घरेलू विवाद बढ़ रहे थे। ऐसे में पुलिस द्वारा की गई यह कार्रवाई गांव को नशामुक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि जब मीडिया, समाज और प्रशासन एकजुट होकर किसी जनसमस्या के खिलाफ खड़े होते हैं, तो सकारात्मक परिणाम अवश्य सामने आते हैं। समाचार के माध्यम से उठाई गई जनभावनाओं को गंभीरता से लेते हुए पुलिस प्रशासन ने जिस तत्परता और जिम्मेदारी का परिचय दिया है, वह निश्चित रूप से सराहनीय है।

क्षेत्र के लोगों ने पुलिस टीम की कार्यशैली की प्रशंसा करते हुए कहा कि यदि इसी प्रकार लगातार कार्रवाई जारी रही तो अवैध शराब कारोबारियों के हौसले पूरी तरह पस्त हो जाएंगे। साथ ही ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गांव में सक्रिय अन्य संदिग्ध ठिकानों की भी जांच कर वहां चल रहे अवैध कारोबार पर तत्काल रोक लगाई जाए।
टोनाटार में हुई यह कार्रवाई न केवल कानून का प्रभावी क्रियान्वयन है, बल्कि यह समाज विरोधी गतिविधियों के खिलाफ शासन-प्रशासन की प्रतिबद्धता का भी प्रमाण है। अब जरूरत इस बात की है कि इस अभियान को निरंतर जारी रखा जाए ताकि गांवों में फैल रही नशे की संस्कृति पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सके और आने वाली पीढ़ियों को एक सुरक्षित, स्वस्थ और नशामुक्त वातावरण उपलब्ध कराया जा सके। प्रशासन की यह सख्ती निश्चित रूप से उन लोगों के लिए चेतावनी है जो अब भी अवैध शराब के कारोबार में लिप्त हैं कि कानून के हाथ लंबे हैं और समाज को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कार्रवाई तय है।