
सब जेल देपालपुर में प्रेरक योग-दोहों के साथ कराए गए योगाभ्यास ने जगाई नई चेतना – बंदियों ने लिया स्वस्थ जीवन का संकल्प,योग-गुरु हुए सम्मानित
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भारतीय संस्कृति की सनातन चेतना, आत्मअनुशासन और अंतर्मन की शांति का दिव्य साधन योग जब सुधार एवं पुनर्संस्कार के केंद्रों तक पहुंचता है, तब वह केवल व्यायाम नहीं बल्कि जीवन परिवर्तन का माध्यम बन जाता है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर सब जेल देपालपुर में आयोजित योग शिविर ने स्वास्थ्य, आत्मबल और सकारात्मक चिंतन की ऐसी अलख जगाई, जिसने बंदियों के मन में नवजीवन और आत्मविश्वास का संचार किया। जिला न्यायाधीश हिदायत उल्ला खान के प्रेरणादायी संदेश, योगमय दोहों और सामूहिक योगाभ्यास ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से अनुप्राणित कर दिया, जहाँ योग ने स्वस्थ शरीर के साथ-साथ स्वस्थ विचारों और उज्ज्वल भविष्य की राह भी प्रशस्त की।

देपालपुर (दैनिक जय संगवारी )अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर तहसील विधिक सेवा समिति, जेल प्रशासन एवं जन अभियान परिषद के संयुक्त तत्वावधान में सबजेल देपालपुर में एक विशेष एवं प्रेरणादायी योग शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि तहसील विधिक सेवा समिति के अध्यक्ष एवं जिला न्यायाधीश हिदायत उल्ला खान रहे। शिविर में बंदियों एवं जेल स्टाफ ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए योगासन, प्राणायाम एवं ध्यान का अभ्यास किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि जिला न्यायाधीश हिदायत उल्ला खान ने कहा कि योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने का माध्यम नहीं है, बल्कि मन, बुद्धि और आत्मा के संतुलन का पूर्ण विज्ञान है। योग व्यक्ति को आत्म अनुशासन, सकारात्मक सोच तथा जीवन में नई ऊर्जा प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि यदि योग को नियमित दिनचर्या का हिस्सा बना लिया जाए तो तनाव, अवसाद और अनेक शारीरिक समस्याओं से मुक्ति प्राप्त की जा सकती है।

इस अवसर पर उन्होंने योग की महत्ता को रेखांकित करते हुए प्रेरक दोहे भी प्रस्तुत किए, जिन्हें सभी ने खूब सराहा।
उन्होंने कहा कि जेलों में माननीय मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मार्गदर्शन में साप्ताहिक योग गतिविधियों का आयोजन बंदियों के व्यक्तित्व विकास, मानसिक शांति एवं पुनर्वास की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है।
योग गुरु डॉ. इंदरसिंह राठौर ने अपने सहयोगी गोविंदा के साथ बंदियों एवं जेल कर्मचारियों को ताड़ासन, वृक्षासन, भुजंगासन सहित विभिन्न योगासनों का अभ्यास कराया। उन्होंने योग को निरोगी, संतुलित एवं अनुशासित जीवन की आधारशिला बताते हुए सभी को प्रतिदिन योग करने की प्रेरणा दी।

सहायक जेल अधीक्षक रामसहाय कुशवाह ने कहा कि योग के नियमित अभ्यास से बंदियों के व्यवहार, मानसिक स्वास्थ्य एवं आत्मविश्वास में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलते हैं। यह उन्हें जीवन की नई दिशा प्रदान करने का प्रभावी माध्यम है।
कार्यक्रम में जन अभियान परिषद के ब्लॉक समन्वयक सुरेशचंद्र यादव ने भी योग के सामाजिक एवं स्वास्थ्यगत महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि योग भारतीय संस्कृति की ऐसी अमूल्य धरोहर है जो व्यक्ति को स्वयं से जोड़ने का कार्य करती है।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर जेल प्रशासन एवं तहसील विधिक सेवा समिति द्वारा योग शिविर के सफल संचालन में उल्लेखनीय योगदान के लिए योग गुरु डॉ. इंदरसिंह एवं उनके सहयोगी गोविंदा को मेडल एवं प्रमाण पत्र से सम्मानित किया गया साथ ही जेल प्रशासन के आई-गाट पोर्टल में उल्लेखनीय कार्य संपादन हेतु सहायक जेल अधीक्षक आरएस कुशवाह,
प्रमुख मुख्य प्रहरी रामेश्वर झणिया, प्रहरी रामकरण सोनगरें, विवेक शर्मा,लोकेंद्र सिंह,संतोष देवरिया,नाना अरड, राजेश भूरिया,मनोज कुशवाह,
भैरम सिंह धाकड़,रविंद्र सोलंकी, शहजाद हुसैन, सुनील मुवेल, सुभाष,महिला प्रहरी एकता पटेल, निर्मला डावर,आरती डावर, मोनिका जाटवा को भी प्रमाण पत्र प्रदाय कर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में नायब नाजिर दिलीप यादव,नवाकुर एवं ग्राम प्रस्फुटन समिति के पप्पू परमार, मुरारी पटेल,निरंजन मौर्य, सीताराम, नारायण पटेल, हरिओम गौरव एवं सुमित सहित संपूर्ण जेल स्टाफ एवं बंदीगण उपस्थित रहे।
शिविर के अंत में सभी उपस्थित जनों ने नियमित योगाभ्यास करने, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने तथा योग के माध्यम से शारीरिक एवं मानसिक सुदृढ़ता प्राप्त करने का संकल्प लिया। पूरे कार्यक्रम में स्वास्थ्य, अनुशासन और सकारात्मक जीवन मूल्यों का संदेश प्रभावी रूप से प्रतिध्वनित होता रहा।