रफ्तार का कहर: बाइक और ट्रेलर की भिड़ंत में 55 वर्षीय युवक की दर्दनाक मौत

🛑SECL के कोयला परिवहन मार्ग पर सुरक्षा सवालों के घेरे में: रफ्तार, लापरवाही या नशा… हादसे का सच जांच में खुलेगा🛑

राजेंद्रा गेट फिर बना हादसे का गवाह, ट्रेलर छोड़ चालक फरार; भारी वाहनों की बेलगाम रफ्तार पर उठे गंभीर सवाल

🛑इंट्रो को बॉक्स बना कर लगाए 🛑

रफ्तार का कहर एक बार फिर सड़क पर मौत की इबारत लिख गया। खैरहा थाना क्षेत्र का राजेंद्रा गेट एक बार फिर खून से सना सवाल बनकर खड़ा है। बाइक और कोयला परिवहन में लगे ट्रेलर की भीषण भिड़ंत में करीब 55 वर्षीय मोहम्मद मकबूल की जिंदगी असमय मौत के आगोश में समा गई। हादसे के बाद ट्रेलर चालक वाहन छोड़कर फरार हो गया। लेकिन पीछे छोड़ गया कई ऐसे सवाल, जिनका जवाब अब व्यवस्था को देना होगा। आखिर भारी वाहनों की बेलगाम रफ्तार पर लगाम कब लगेगी? सड़क सुरक्षा के नियम सिर्फ कागजों पर हैं या धरातल पर भी? राजेंद्रा गेट जैसे संवेदनशील मार्ग पर निगरानी और यातायात नियंत्रण की व्यवस्था कहां है? क्या यह चालक की कथित लापरवाही थी, सड़क की खामी, परिवहन व्यवस्था की चूक या किसी और कारण का परिणाम? चालक नशे में था या नहीं, यह भी जांच का विषय है। सच क्या है, यह पुलिस की निष्पक्ष जांच ही बताएगी; लेकिन एक परिवार की दुनिया जरूर उजड़ चुकी है।

✍️ अतीक खान
शहडोल(दैनिक विश्व की महिमा )खैरहा थाना क्षेत्र अंतर्गत राजेंद्रा गेट के समीप सोमवार को सड़क पर दौड़ती रफ्तार ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। बाइक और ट्रेलर के बीच हुई जोरदार भिड़ंत में बाइक सवार खैरहा निवासी मोहम्मद मकबूल (लगभग 55 वर्ष) की दर्दनाक मौत हो गई। टक्कर इतनी भीषण बताई जा रही है कि हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई। दुर्घटना के बाद ट्रेलर चालक वाहन मौके पर छोड़कर फरार हो गया। सूचना मिलते ही खैरहा पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का जायजा लेकर आवश्यक कार्रवाई शुरू की।
🛑हादसे ने एक बार फिर उस पुराने और बेहद गंभीर सवाल को सामने ला खड़ा किया है।.🛑
आखिर भारी वाहनों की बेलगाम रफ्तार पर लगाम कब लगेगी? सड़क पर ट्रैफिक नियम हैं भी या सिर्फ कागजों की शोभा बढ़ा रहे हैं?
🛑रफ्तार पर कब लगेगी लगाम?🛑
राजेंद्रा गेट और आसपास के मार्ग से कोयला परिवहन करने वाले भारी वाहनों की आवाजाही कोई नई बात नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मार्ग पर भारी वाहनों की तेज रफ्तार को लेकर लंबे समय से चिंता जताई जाती रही है। सवाल यह है कि यदि लगातार दुर्घटनाओं की आशंका बनी हुई है तो यातायात व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए ठोस कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे?
क्या सड़क पर दौड़ते ट्रेलर और ट्रक के लिए गति सीमा महज एक औपचारिकता बनकर रह गई है? क्या वाहनों की गति पर नियमित निगरानी होती है? क्या चालकों के दस्तावेज, फिटनेस और नशे की स्थिति की जांच नियमित रूप से की जाती है? और सबसे बड़ा सवाल—यदि कोयला परिवहन व्यवस्था में सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है तो फिर हादसों की यह श्रृंखला कब थमेगी?
🛑SECL की जिम्मेदारी या चालकों की मनमानी?🛑
कोयला परिवहन से जुड़े भारी वाहनों की आवाजाही वाले मार्गों पर सड़क सुरक्षा केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं हो सकती। SECL और परिवहन व्यवस्था से जुड़े संबंधित पक्षों की भूमिका पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। क्या भारी वाहनों की गति पर प्रभावी नियंत्रण के पर्याप्त इंतजाम हैं? क्या संवेदनशील स्थानों पर चेतावनी संकेत, स्पीड मॉनिटरिंग और सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त है?
हालांकि यह कहना जल्दबाजी होगी कि हादसे के पीछे SECL की लापरवाही थी या ट्रक चालक की कथित मनमानी। इन सवालों का अंतिम उत्तर पुलिस की निष्पक्ष जांच और उपलब्ध साक्ष्यों से ही सामने आएगा।
🛑चालक नशे में था या नहीं, जांच से खुलेगा राज🛑
हादसे के बाद ट्रेलर चालक का वाहन छोड़कर फरार होना भी जांच का महत्वपूर्ण बिंदु है। क्या चालक अत्यधिक गति से वाहन चला रहा था? क्या वह शराब के नशे में था? क्या उसने किसी अन्य मादक पदार्थ का सेवन किया था? क्या वाहन में कोई तकनीकी खराबी थी? या फिर यह महज एक दुर्भाग्यपूर्ण सड़क दुर्घटना थी?
इनमें से किसी भी संभावना को अभी तथ्य नहीं माना जा सकता। पुलिस को चालक की तलाश के साथ-साथ मेडिकल एवं अन्य वैज्ञानिक जांच, वाहन की तकनीकी स्थिति, घटनास्थल के साक्ष्य, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और सीसीटीवी फुटेज सहित सभी पहलुओं की पड़ताल करनी होगी। तभी दुर्घटना की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।
🛑दो दिन पहले गाय की मौत, अब इंसानी जिंदगी पर ग्रहण🛑
स्थानीय लोगों के मुताबिक, करीब दो दिन पहले इसी क्षेत्र में एक ट्रक की चपेट में आने से गाय की मौत हो गई थी। अब एक इंसान की जिंदगी चली गई। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं सड़क सुरक्षा व्यवस्था के लिए खतरे की घंटी हैं।
सवाल सिर्फ एक हादसे का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का है जिसमें भारी वाहन लगातार सड़कों पर दौड़ रहे हैं और आम राहगीर अपनी जान हथेली पर लेकर सफर करने को विवश हैं।
मोहम्मद मकबूल की मौत ने एक परिवार को ऐसा जख्म दिया है जिसकी टीस शायद जिंदगी भर रहेगी। अब जरूरत है कि इस हादसे को महज एक और दुर्घटना मानकर फाइलों में दफन न किया जाए। पुलिस निष्पक्ष और गहन जांच करे, दोषी पाए जाने पर कठोर कार्रवाई हो तथा राजेंद्रा गेट क्षेत्र में भारी वाहनों की गति, यातायात नियमों और सड़क सुरक्षा इंतजामों की गंभीरता से समीक्षा की जाए।
क्योंकि सवाल आज सिर्फ मोहम्मद मकबूल का नहीं है—सवाल यह है कि अगली बार सड़क पर किसकी जिंदगी रफ्तार की भेंट चढ़ेगी?

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