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इंदौर की सांस्कृतिक चेतना और साहित्यिक सरोकारों से ओतप्रोत गांधी हॉल परिसर में जब स्मृतियों ने शब्दों का रूप लिया और श्रद्धा ने भावनाओं का आलोक धारण किया, तब स्वर्गीय पं. तेजबहादुर शर्मा जी की चतुर्थ पुण्य स्मरण सभा एक साधारण श्रद्धांजलि समारोह न रहकर न्याय, साहित्य, समाजसेवा और मानवीय संवेदनाओं का अनुपम संगम बन गई। विधि-जगत की गरिमा, साहित्य की संवेदना और सामाजिक प्रतिबद्धता से सुसज्जित इस अवसर पर उपस्थित प्रबुद्धजनों ने अपने संस्मरणों के माध्यम से उस विराट व्यक्तित्व को पुनः जीवंत कर दिया, जिसकी कर्मनिष्ठा और आत्मीयता आज भी स्मृतियों में सुवासित है।
समारोह का सबसे गौरवपूर्ण क्षण तब आया, जब वर्ष 2026 का प्रतिष्ठित ‘पं. तेजबहादुर शर्मा सम्मान’ राष्ट्रीय कवि एवं पूर्व विधायक पं. सत्यनारायण सत्तन ‘गुरुजी’ को शाल, श्रीफल, प्रशस्ति-पत्र एवं ₹11,111 की सम्मान राशि के साथ अर्पित किया गया। यह सम्मान मानो साहित्य और समाज के उस दीपस्तंभ को नमन था, जिसने शब्दों को जनचेतना और संस्कृति को जीवन-मूल्यों से जोड़ा है।
कार्यक्रम में न्यायमूर्ति एस.के. अवस्थी सहित न्यायपालिका, अधिवक्ता जगत और सामाजिक क्षेत्र की अनेक विभूतियों की उपस्थिति ने आयोजन को विशिष्ट गरिमा प्रदान की। जिला न्यायाधीश हिदायत उल्ला खान की भावपूर्ण नज़्म ने वातावरण को करुणा, स्मृति और आत्मीयता से भर दिया। विशेष रूप से उनकी पंक्तियाँ—“हमें पूरा यकीं है, तुम अभी से मर नहीं सकते”—ने मानो यह संदेश दिया कि श्रेष्ठ व्यक्तित्व देह से विदा होकर भी विचारों और संस्कारों में सदैव जीवित रहते हैं।
संविधान की प्रतियां भेंट करने की पहल ने समारोह को एक गहरे वैचारिक अर्थ से जोड़ा—न्याय, संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति सतत प्रतिबद्धता का। इस प्रकार यह आयोजन श्रद्धांजलि से आगे बढ़कर स्मृति, संस्कार, साहित्य और सामाजिक उत्तरदायित्व का ऐसा उज्ज्वल अध्याय बन गया, जिसकी अनुभूति लंबे समय तक मन में बनी रहेगी।

✍️अतीक खान
इंदौर,गांधी हॉल परिसर इंदौर में स्वर्गीय पं. तेजबहादुर शर्मा जी की चतुर्थ पुण्य स्मरण सभा गरिमामय वातावरण में आयोजित हुई। न्याय, विधि, साहित्य और समाजसेवा के क्षेत्र से जुड़े प्रबुद्धजनों की उपस्थिति में आयोजित इस स्मृति समारोह में पं. तेजबहादुर शर्मा के व्यक्तित्व, कृतित्व और उनकी अमिट स्मृतियों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
कार्यक्रम का शुभारंभ पूजा मंडोवरा द्वारा राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के संपूर्ण गायन से हुआ। इसके पश्चात वर्ष 2026 का प्रतिष्ठित ‘पं. तेजबहादुर शर्मा सम्मान’ राष्ट्रीय कवि एवं पूर्व विधायक पं. सत्यनारायण सत्तन ‘गुरुजी’ को प्रदान किया गया। उन्हें शाल, श्रीफल, प्रशस्ति-पत्र एवं ₹11,111/- (ग्यारह हजार एक सौ ग्यारह रुपये) की सम्मान राशि भेंट कर सम्मानित किया गया। प्रशस्ति-पत्र का प्रभावपूर्ण वाचन इंदौर के प्रमुख शायर धीरज चौहान ‘सालार’ ने किया।

समारोह में मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधिपति एवं औद्योगिक न्यायालय, इंदौर के पूर्व चेयरमैन न्यायमूर्ति एस.के. अवस्थी, विशेष न्यायाधीश दिनेश प्रसाद मिश्रा, देपालपुर के जिला न्यायाधीश हिदायत उल्ला खान, वरिष्ठ समाजसेवी नेता कृपाशंकर शुक्ला, पूर्व विधायक कसरावद आत्माराम पटेल, हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अधिवक्ता मनीष यादव, जिला अधिवक्ता संघ इंदौर के अध्यक्ष राकेश पाल, स्टेट बार कौंसिल के सदस्य नरेंद्र जैन, जय हार्डिया एवं अखिलेश सक्सेना सहित हाई कोर्ट एवं जिला अधिवक्ता संघ के अनेक सम्मानित पदाधिकारी एवं अधिवक्तागण उपस्थित रहे।
सभी अतिथियों ने अपने उद्बोधन में पं. तेजबहादुर शर्मा जी के साथ जुड़े संस्मरण साझा करते हुए उनके विधि-जगत में योगदान, व्यक्तित्व की गरिमा, सामाजिक सरोकारों और मानवीय संवेदनाओं को स्मरण किया। वक्ताओं ने कहा कि कुछ व्यक्तित्व देहावसान के बाद भी अपने विचारों, कर्मों और आत्मीय स्मृतियों के माध्यम से समाज में जीवित रहते हैं और पं.शर्मा भी ऐसी ही विराट और प्रेरणादायी शख्सियत थे।
इस अवसर पर जिला न्यायाधीश हिदायत उल्ला खान ने स्वर्गीय पं. तेजबहादुर शर्मा जी के व्यक्तित्व एवं स्मृतियों को समर्पित अपनी भावपूर्ण नज़्म प्रस्तुत की। नज़्म में वकील साहब के व्यक्तित्व, उनकी मानवीय संवेदनाओं और उनसे जुड़ी स्मृतियों को शब्दों में पिरोया गया। उनकी नज़्म –
“किसी मजबूर आंखों में,
दिखें जब न्याय उम्मीदें,
तो लगता है बहादुर तेज शर्मा,
तुम यहीं पर हो।
तुम्हें हम सिर्फ श्रद्धा के सुमन, अर्पित नहीं करते,
हमें पूरा यकीं है, तुम अभी से मर नहीं सकते।।
की प्रस्तुति ने समारोह को भावनात्मक ऊंचाई प्रदान की और उनकी इस नज़्म की उपस्थित जनसमुदाय ने मुक्तकंठ से सराहना की।
समारोह की एक विशेष पहल के रूप में सभी अतिथियों को आयोजकों डॉ. अंजना शर्मा एडवोकेट एवं सौरभ जी द्वारा प्रतीक-चिह्न के रूप में भारत के संविधान की प्रति भेंट की गई। यह उपहार केवल स्मृति-चिह्न नहीं, बल्कि विधि, न्याय, संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता का संदेश भी रहा।

कार्यक्रम का सार्थक एवं प्रभावी संचालन श्याम दांगी ने किया, जबकि पुरुषोत्तम धाकड़ एडवोकेट ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के पश्चात उपस्थित अतिथियों एवं गणमान्यजनों ने सहभोज में सहभागिता कर आत्मीय मिलन को और अधिक गरिमामय बनाया।
पं. तेजबहादुर शर्मा जी की स्मृति में आयोजित यह समारोह केवल एक पुण्य स्मरण नहीं, बल्कि विधि-जगत की गौरवशाली परंपराओं, मानवीय मूल्यों और समाज के प्रति उत्तरदायित्व को पुनः स्मरण करने का अवसर बन गया।
कार्यक्रम को सदैव की भांति सफल, सार्थक एवं भव्य स्वरूप प्रदान करने में अभिभाषक संघ इंदौर, परशुराम ब्राह्मण महासभा इंदौर तथा डॉ. अंजना शर्मा एडवोकेट की पूरी टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा। आयोजन की गरिमा और सफलता के लिए आयोजकों की ओर से सभी अतिथियों, अधिवक्ताओं, पदाधिकारियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।