
शहडोल संभाग के हृदयस्थल में अंतरराज्यीय जुए के संचालन का दावा; स्थानीय पुलिस की कार्यवाही पर उठे सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग
जमुई के जंगलों से गोरतरा के अंडहाई तक लाखों के दांव की चर्चा, कथित जुआ कारोबार पर अंकुश लगाने में पुलिस की भूमिका भी जांच के घेरे में
शहडोल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक अब शहडोल जिले में कथित तौर पर संचालित हो रहे जुए के फड़ों का मामला पहुंचाने की तैयारी है। संभागीय मुख्यालय के निकट सोहागपुर थाना क्षेत्र के ग्राम जमुई के जंगलों में बड़े पैमाने पर जुआ संचालित होने की स्थानीय चर्चाओं और शिकायतों को लेकर पत्रकार अतीक खान मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपेंगे। ज्ञापन के माध्यम से कथित अंतरराज्यीय जुआ गतिविधियों की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार लोगों की पहचान और संबंधित पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की जाएगी।
शहडोल जिले में जुए के कथित फड़ों को लेकर उठ रहे सवालों ने कानून-व्यवस्था और पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर बहस छेड़ दी है। ग्राम जमुई के जंगलों से लेकर गोरतरा के अंडहाई क्षेत्र तक लाखों रुपये के दांव लगाए जाने के दावे किए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि धनपुरी, बुढ़ार, अमलाई, कोतमा और शहडोल के अलावा दूसरे क्षेत्रों से भी लोग इन कथित ठिकानों पर पहुंचते हैं। हालांकि, इन गतिविधियों के अंतरराज्यीय स्वरूप और लेन-देन की मात्रा की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
मुख्यमंत्री तक पहुंचेगा सवाल—आखिर किसकी जवाबदेही?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि इन क्षेत्रों में लंबे समय से जुए के फड़ संचालित होने की सूचनाएं सामने आ रही हैं, तो उन पर प्रभावी कार्यवाही क्यों नहीं दिखाई दे रही? क्या पुलिस को इन गतिविधियों की जानकारी नहीं मिल पा रही, या फिर सूचना तंत्र और निगरानी व्यवस्था में कहीं गंभीर चूक है? इन सवालों का जवाब जांच और आधिकारिक तथ्यों से ही सामने आ सकता है।
पत्रकारों की प्रस्तावित पहल का उद्देश्य मुख्यमंत्री का ध्यान इस ओर आकर्षित करना है कि जिले में अवैध जुए की शिकायतों को केवल स्थानीय चर्चा मानकर नजरअंदाज न किया जाए। यदि शिकायतों में दम है, तो संबंधित क्षेत्रों में विशेष टीम भेजकर जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्यवाही हो।
जंगलों में फड़, लाखों के दांव और सूचना लीक होने के आरोप
स्थानीय सूत्रों के हवाले से जमुई के जंगलों और गोरतरा के अंडहाई इलाके में जुए की महफिल सजने के दावे किए जा रहे हैं। कुछ लोगों की कथित भूमिका तथा पुलिस और वन विभाग से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी पहले ही पहुंच जाने के आरोप भी लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और किसी सरकारी कर्मचारी की संलिप्तता को प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।
यदि पुलिस कार्यवाही से पहले सूचना लीक होने की शिकायत सही पाई जाती है, तो यह केवल जुआ संचालन का मामला नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी तंत्र की जवाबदेही से जुड़ा गंभीर प्रश्न बन जाएगा। ऐसे में निष्पक्ष जांच के साथ यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि संबंधित इलाकों में गश्त, निगरानी और शिकायतों पर कार्यवाही की वास्तविक स्थिति क्या है।
शहडोल और सोहागपुर पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल
जुए के कथित फड़ों को लेकर लगातार चर्चाओं के बीच शहडोल जिला पुलिस और सोहागपुर थाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। नागरिकों की अपेक्षा है कि पुलिस केवल सामान्य गश्त तक सीमित न रहे, बल्कि शिकायतों के आधार पर संदिग्ध ठिकानों की पहचान कर ठोस कार्रवाई करे। यदि हथियारों की मौजूदगी या लोगों को धमकाने जैसी शिकायतें सामने आती हैं, तो उनकी भी अलग से जांच की जानी चाहिए।
हालांकि, पुलिस की मिलीभगत अथवा जानबूझकर अनदेखी का निष्कर्ष बिना जांच के निकालना उचित नहीं होगा। लेकिन शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए उन्हें नजरअंदाज करना भी जनहित में नहीं है। पारदर्शी कार्रवाई से ही यह स्पष्ट होगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और जिम्मेदारी किसकी बनती है।
ज्ञापन में उठेगी विशेष जांच टीम गठित करने की मांग
मुख्यमंत्री को सौंपे जाने वाले प्रस्तावित ज्ञापन में ग्राम जमुई के जंगलों और गोरतरा के अंडहाई क्षेत्र सहित अन्य संदिग्ध स्थानों की जांच के लिए विशेष टीम गठित करने की मांग की जाएगी। साथ ही, कथित जुआ संचालन में शामिल लोगों, संभावित आर्थिक लेन-देन और कार्यवाही से पहले सूचना लीक होने के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग भी रखी जाएगी।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच स्थानीय स्तर से ऊपर के सक्षम अधिकारियों की निगरानी में कराने की मांग उठ सकती है, ताकि किसी भी प्रकार के दबाव या पक्षपात की आशंका न रहे।
अब सवाल सिर्फ जुए के फड़ों का नहीं, कानून के राज और जवाबदेही का है। मुख्यमंत्री तक शिकायत पहुंचने के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शासन इन आरोपों की जांच के लिए क्या कदम उठाता है। जमुई और आसपास के क्षेत्रों में कथित जुआ गतिविधियों की सच्चाई सामने आना जरूरी है, ताकि अफवाहों पर विराम लगे, दोषियों पर कार्यवाही हो और निर्दोष लोगों को बेवजह आरोपों का सामना न करना पड़े।