धनपुरी नगर के वार्ड क्रमांक 24 में विकास के नाम पर ‘विनाश’! टूटी सड़कें, अधूरी पाइपलाइन और नाराज़ जनता


धनपुरी। नगर पालिका धनपुरी के वार्ड क्रमांक 24 के रहवासी इन दिनों बदहाली और अव्यवस्था के बीच जीवन गुजारने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वार्ड में विकास कार्यों के नाम पर केवल दिखावा किया जा रहा है, जबकि हकीकत में सड़कों का विनाश और अधूरे कामों की लंबी सूची छोड़ दी गई है। हालात ऐसे हो गए हैं कि वार्ड के लोग रोजमर्रा के आवागमन के लिए भी परेशान हैं।
स्थानीय निवासियों के अनुसार कुछ समय पहले ही वार्ड के मुख्य मार्ग का निर्माण युवाओं के प्रयास से कराया गया था। युवाओं ने ज्ञापन देकर सड़क बनवाई थी, जिससे लोगों को आवागमन में बड़ी राहत मिली थी। लेकिन अब वही सड़क पाइपलाइन बिछाने के नाम पर पूरी तरह उखाड़ दी गई है। आरोप है कि नल-जल योजना के नाम पर थोड़ी-सी पाइपलाइन बिछाकर पूरी बनी-बनाई सड़क को बर्बाद कर दिया गया, जबकि आज तक वार्ड में किसी भी घर के नल से एक बूंद पानी तक नहीं टपकी है।
लोगों का कहना है कि वर्षों पहले शुरू की गई नल-जल योजना पूरे क्षेत्र में पानी पहुंचाने का दावा करती है, लेकिन वार्ड क्रमांक 24 में यह योजना सिर्फ कागजों और अधूरे गड्ढों तक ही सीमित है। पाइपलाइन का काम आधा-अधूरा छोड़ दिया गया और सड़कें ऐसी हालत में पहुंचा दी गईं कि लोगों का चलना तक मुश्किल हो गया है।
कुछ दिन पहले भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने ज्वालामुखी मार्ग से लगे घरों में पेयजल की समस्या को लेकर नगर पालिका को ज्ञापन सौंपा था। मांग की गई थी कि यहां पाइपलाइन बिछाकर लोगों को पानी की सुविधा दी जाए। लेकिन आरोप है कि जनप्रतिनिधि इस मांग को गंभीरता से लेने के बजाय विकास के नाम पर ठेकेदारी करने में व्यस्त हैं और वार्ड की जनता को केवल आश्वासन देकर टाल रहे हैं।
वार्ड के लोगों का कहना है कि अधूरे और अव्यवस्थित कामों के कारण पूरा वार्ड परेशान है। सफाई व्यवस्था भी बदहाल है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सफाई के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई जाती है और वास्तविक स्थिति पर ध्यान नहीं दिया जाता। गली-मोहल्लों में गंदगी और अव्यवस्था से लोग त्रस्त हैं।


कुछ रहवासियों का यह भी कहना है कि वार्ड के जनप्रतिनिधि को सभापति पद से हटाए जाने के बाद से वे नाराज चल रहे हैं और इसका खामियाजा वार्ड की जनता भुगत रही है। लोगों का आरोप है कि विकास कार्यों की गति थम गई है और जो काम हो रहे हैं, वे भी बिना योजना और गुणवत्ता के किए जा रहे हैं।
वार्ड के नागरिकों में इस बात को लेकर भी आक्रोश है कि जनप्रतिनिधि खुद ठेकेदार की भूमिका में नजर आ रहे हैं। लोगों का आरोप है कि वार्ड के विकास के बजाय निजी विकास पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। कुछ लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि कम समय में बड़ी-बड़ी गाड़ियां, जेसीबी, लग्जरी वाहन और हाईवे से लगे क्षेत्रों में नजूल जमीन पर कॉम्प्लेक्स निर्माण आखिर किस विकास की कहानी बयान कर रहा है।
नाराज नागरिकों का कहना है कि जब सड़कों की हालत बदतर है, पानी की सुविधा नहीं है और सफाई व्यवस्था चरमराई हुई है, तब “सबका साथ, सबका विकास” जैसे नारों का क्या मतलब रह जाता है?
वार्ड के लोग अब खुलकर कहने लगे हैं कि जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही तय करने का समय आ गया है। उनका कहना है कि जनप्रतिनिधियों के कार्यकाल के अब ज्यादा दिन नहीं बचे हैं और आगामी चुनाव में जनता विकास के नाम पर की गई मनमानी का जवाब जरूर देगी। लोगों के अनुसार जमीन पर किए गए कार्यों का रिपोर्ट कार्ड अब जनता के मन में साफ-साफ दर्ज हो चुका है, जिसका फैसला आने वाले चुनाव में दिखाई

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