
धनपुरी, शहडोल (म.प्र.)
“अजब है मध्यप्रदेश, गजब है मध्यप्रदेश”—यह सिर्फ एक सरकारी नारा बनकर रह गया है, क्योंकि बघेलखंड की एक कहावत आज धनपुरी नगर पालिका पर पूरी तरह सटीक बैठ रही है—“सूपा बोले तो बोले, यहाँ तो चलनी भी बोल रही है।”
नगर पालिका धनपुरी इन दिनों अपने कारनामों को लेकर सुर्खियों में है। एक समय बड़े घोटालों के लिए बदनाम रही यह नगर पालिका अब अपने ही कर्मचारियों के शोषण और तानाशाही रवैये के कारण चर्चा में है। हालात ऐसे हैं कि कर्मचारियों से सुबह 10:30 बजे से लेकर रात 9:30 बजे तक लगातार काम कराया जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें न तो ओवरटाइम का भुगतान मिल रहा है और न ही समय पर वेतन। 18 तारीख गुजर जाने के बाद भी कर्मचारियों के खातों में वेतन नहीं पहुंचा, जिससे उनके घरों में आर्थिक संकट गहरा गया है।
कर्मचारियों की पीड़ा अब खुलकर सामने आने लगी है। उनका कहना है कि वे मजबूरी में चुप हैं क्योंकि उनका भविष्य अधिकारियों के हाथ में है, लेकिन यह चुप्पी ज्यादा दिन तक नहीं टिकेगी। स्थिति और भी गंभीर तब हो जाती है जब चैत्र नवरात्र जैसे पवित्र पर्व में भी कर्मचारियों को वेतन से वंचित रखा जाता है। एक ओर पूरा देश श्रद्धा और भक्ति में डूबा है, वहीं धनपुरी के कर्मचारियों के घरों में तंगी और निराशा का माहौल है।
कर्मचारियों का आरोप है कि वे दिन-रात मेहनत करते हैं, राजस्व वसूली से लेकर अन्य कार्यों तक अपनी जिम्मेदारी पूरी निष्ठा से निभाते हैं, लेकिन बदले में उन्हें केवल उपेक्षा और दबाव ही मिलता है। उनका कहना है कि ऐसा प्रतीत होता है जैसे वे कर्मचारी नहीं बल्कि किसी तानाशाही व्यवस्था के गुलाम हों।
मुख्य नगर पालिका अधिकारी पूजा बुनकर का नाम पहले भी विवादों में रह चुका है। उनके पूर्व कार्यकाल में नगरपालिका परिषद सिवनी में वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप सामने आए थे। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि सामग्री क्रय में भारी गड़बड़ियां की गईं, जिसमें हाईमास्ट पोल और लाइटों की खरीद ऊंची दरों पर की गई और शासन को लाखों रुपये का नुकसान पहुंचाया गया। जांच के बाद उनके वेतन से 7.16 लाख रुपये की वसूली और दो वेतनवृद्धियां रोकने जैसी सख्त कार्रवाई भी की गई थी।
इसके बावजूद आज वही अधिकारी धनपुरी नगर पालिका में कर्मचारियों पर सख्ती और दबाव का माहौल बना रही हैं। सूत्रों के अनुसार, लगातार बढ़ते तनाव और तानाशाही रवैये से परेशान होकर कई कर्मचारी अपना तबादला करवाने की कोशिश में जुटे हुए हैं। वहीं एक और गंभीर आरोप यह भी सामने आया है कि एक कथित करीबी व्यक्ति, जिसका आपराधिक इतिहास रहा है, कर्मचारियों के खिलाफ झूठी शिकायतें कर उन्हें परेशान कराने में लगा हुआ है।
इन सब परिस्थितियों के बीच सबसे अधिक पीड़ा उन कर्मचारियों को हो रही है जो पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ अपना काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें मानसिक और आर्थिक दबाव झेलना पड़ रहा है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर कर्मचारियों से जबरन इतनी लंबी ड्यूटी क्यों करवाई जा रही है, उनका वेतन समय पर क्यों नहीं दिया जा रहा, और जिन अधिकारियों पर पहले से भ्रष्टाचार के आरोप सिद्ध हो चुके हैं, उन्हें इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी क्यों सौंपी जा रही है।
धनपुरी नगर पालिका आज एक बड़ा प्रश्न बनकर खड़ी है—क्या यहां प्रशासन चलेगा या तानाशाही? अब यह देखना बाकी है कि शासन और प्रशासन इस पूरे मामले में कब तक मौन रहता है या फिर कर्मचारियों को न्याय दिलाने के लिए कोई ठोस कदम उठाता है।