मानवता की मिसाल बने इंटक महामंत्री अमरजीत सिंह : 46वीं बार स्वैच्छिक रक्तदान कर बढ़ाया एसईसीएल सोहागपुर का गौरव

मुख्य महाप्रबंधक बी.के. जेना के प्रेरक नेतृत्व में विश्व रक्तदाता दिवस पर सेवा, समर्पण और संवेदना का अद्भुत संगम

धनपुरी।
विश्व रक्तदाता दिवस के पावन अवसर पर एसईसीएल सोहागपुर क्षेत्र में केंद्रीय चिकित्सालय द्वारा विश्व रक्तदान दिवस के अवसर पर रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया था, जिसमें केंद्रीय चिकित्सालय की सारी टीम वहां पर उपस्थित रही इस अवसर पर केंद्रीय चिकित्सालय में मानव सेवा, सामाजिक उत्तरदायित्व और जनकल्याण की भावना का अनुपम उदाहरण देखने को मिला। जहा इंटक महामंत्री एवं एसईसीएल कर्मी अमरजीत सिंह ने 46वीं बार स्वैच्छिक रक्तदान कर न केवल एक प्रेरणादायी कीर्तिमान स्थापित किया, बल्कि पूरे सोहागपुर क्षेत्र का नाम भी गौरवान्वित किया। उनका यह योगदान समाज के प्रति उनकी संवेदनशीलता, सेवा भावना और मानवीय मूल्यों के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
एसईसीएल सोहागपुर क्षेत्र के केंद्रीय चिकित्सालय में आयोजित रक्तदान शिविर में बड़ी संख्या में अधिकारियों, कर्मचारियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। इस अवसर पर क्षेत्र के मुख्य महाप्रबंधक बी.के. जेना ने भी स्वेच्छा से रक्तदान कर कर्मचारियों और युवाओं को समाजसेवा का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि रक्तदान केवल एक चिकित्सा आवश्यकता नहीं, बल्कि मानव जीवन को बचाने का सबसे बड़ा और पुण्य कार्य है। किसी अज्ञात व्यक्ति के जीवन में नई उम्मीद जगाने का माध्यम बनने से बड़ा कोई धर्म नहीं हो सकता।
मुख्य महाप्रबंधक बी.के. जेना के कुशल नेतृत्व और जनहितकारी सोच की सराहना करते हुए अमरजीत सिंह ने कहा कि उनके मार्गदर्शन में सोहागपुर क्षेत्र में सामाजिक सरोकारों से जुड़े अनेक कार्यक्रम सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि श्री जेना सदैव कर्मचारियों को सेवा और समाजहित के कार्यों के लिए प्रेरित करते हैं, जिसका सकारात्मक प्रभाव पूरे क्षेत्र में दिखाई देता है।
रक्तदान के उपरांत अमरजीत सिंह ने भावपूर्ण शब्दों में कहा,
“रक्तदान केवल रक्त की कुछ बूंदें देना नहीं है, बल्कि किसी जरूरतमंद को नया जीवन प्रदान करने का संकल्प है। जब किसी अस्पताल में जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे मरीज को रक्त की आवश्यकता होती है, तब रक्तदाता ही उसके लिए देवदूत बनकर सामने आता है। मुझे गर्व है कि मैं 46वीं बार रक्तदान कर सका और भविष्य में भी यह सेवा निरंतर जारी रखूंगा। यदि मेरे रक्त की एक बूंद भी किसी परिवार की खुशियां लौटा सकती है, तो इससे बड़ा सौभाग्य मेरे लिए कोई नहीं हो सकता।”
उन्होंने आगे कहा कि रक्तदान से किसी प्रकार की कमजोरी नहीं आती, बल्कि यह शरीर में नए रक्त कोशिकाओं के निर्माण को भी प्रोत्साहित करता है। समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करते हुए उन्होंने युवाओं से अधिक से अधिक संख्या में रक्तदान करने का आह्वान किया।
गौरतलब है कि अमरजीत सिंह एसईसीएल की रेस्क्यू टीम के सक्रिय सदस्य भी रहे हैं और अनेक आपदा एवं बचाव अभियानों में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। श्रमिक हितों के लिए सदैव मुखर रहने वाले अमरजीत सिंह अपने सामाजिक दायित्वों के निर्वहन में भी अग्रणी रहते हैं। यही कारण है कि वे कर्मचारियों, श्रमिकों और आमजन के बीच सम्मान और विश्वास का पर्याय बन चुके हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार रक्तदान एक ऐसा महादान है जिसका कोई विकल्प नहीं है। दुर्घटनाओं, गंभीर बीमारियों, शल्य चिकित्सा, प्रसूति और थैलेसीमिया जैसे रोगों से पीड़ित हजारों मरीजों के जीवन की डोर रक्तदाताओं की उदारता पर निर्भर रहती है। एक यूनिट रक्त कई लोगों के जीवन को बचाने में सहायक बन सकता है। यही कारण है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन सहित विभिन्न स्वास्थ्य संस्थाएं नियमित रक्तदान को मानवता की सर्वोत्तम सेवा मानती हैं।
विश्व रक्तदाता दिवस पर आयोजित यह शिविर केवल एक स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और मानवीय संवेदना का उत्सव बन गया। अमरजीत सिंह का 46वीं बार रक्तदान करना यह सिद्ध करता है कि सेवा का मार्ग आयु नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प और विशाल हृदय तय करता है। उनके इस अनुकरणीय कार्य ने न केवल एसईसीएल सोहागपुर क्षेत्र का मान बढ़ाया है, बल्कि समाज को यह संदेश भी दिया है कि “रक्तदान जीवनदान है, और जीवन से बड़ा कोई उपहार नहीं।”

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