
कलेक्टर कुलदीप शर्मा के निर्देश पर तड़के हुई बड़ी कार्यवाही , प्रशासन ने दिखाया सख्त तेवर
बलौदाबाजार (दैनिक जय संगवारी)। जिले में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन के खिलाफ प्रशासन ने एक बार फिर अपना कड़ा रुख दिखाते हुए रेत माफियाओं पर बड़ा प्रहार किया है। कलेक्टर कुलदीप शर्मा के स्पष्ट निर्देशों के बाद राजस्व एवं पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने शुक्रवार सुबह सघन जांच अभियान चलाकर अवैध रेत परिवहन में संलिप्त 10 हाइवा वाहनों को जब्त कर लिया। इस कार्रवाई के बाद अवैध खनन और परिवहन से जुड़े कारोबारियों में हड़कंप मच गया है।
जानकारी के अनुसार शुक्रवार सुबह लगभग 6 बजे सिमगा स्थित जायसवाल फैमिली ढाबा के पास राजस्व एवं पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम ने नाकाबंदी कर वाहनों की सघन जांच शुरू की। जांच के दौरान कई हाइवा वाहनों में रेत का परिवहन किया जाता पाया गया। जब संबंधित वाहन चालकों से वैध परिवहन पास एवं आवश्यक दस्तावेज मांगे गए तो अधिकांश वाहन चालक कोई भी वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके।
एसडीएम सिमगा अतुल शेट्टे ने बताया कि जांच के दौरान वाहन क्रमांक CG09JT3532, CG09JQ9614, CG09JC8879, CG25G1429, CG25G7400, CG09JT9184, CG25N2896, CG25P9074, CG09JT9614 तथा CG09J50181 में अवैध रूप से रेत परिवहन किया जा रहा था। केवल वाहन क्रमांक CG09JS6362 के चालक द्वारा वैध परिवहन पास प्रस्तुत किया गया, जबकि शेष 10 वाहनों के चालकों के पास कोई दस्तावेज नहीं मिला।
प्रशासनिक कार्यवाही की भनक लगते ही कई वाहन चालक वाहनों की चाबी निकालकर मौके से फरार हो गए। इसके बावजूद संयुक्त टीम ने मौके पर पंचनामा तैयार कर सभी वाहनों को जब्त करते हुए आगे की वैधानिक कार्यवाही प्रारंभ कर दी है।
जिले में लगातार हो रही ऐसी कार्रवाई यह स्पष्ट संकेत है कि अवैध खनन और रेत तस्करी के खिलाफ शासन-प्रशासन अब किसी भी प्रकार की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। प्रशासन के इस सख्त रुख से रेत माफियाओं में भय का माहौल बना हुआ है। लंबे समय से सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने वाले अवैध कारोबारियों को यह संदेश भी मिल गया है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है।
स्थानीय नागरिकों ने भी प्रशासन की इस कार्यवाही का स्वागत करते हुए कहा है कि यदि इसी प्रकार लगातार अभियान जारी रहा तो जिले में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा। प्रशासन की यह कार्यवाही न केवल कानून व्यवस्था की मजबूती का उदाहरण है, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के प्रति शासन की गंभीरता को भी दर्शाती है।