
बदहाली के ‘कीचड़’ में साख चमकाने का खेल
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🛑*✍️अतीक खान की कलम से*
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चिरमिरी / एमसीबी:(दैनिक जय संगवारी )
स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले की खस्ताहाल स्वास्थ्य व्यवस्थाओं से जनता भले ही कराह रही हो, लेकिन अपनी गिरती साख को बचाने और युवाओं में अपनी झूठी चमक बिखेरने के लिए आयोजनों का ढोंग बदस्तूर जारी है। एमसीबी जिले के चिरमिरी स्थित डोमिनहिल अमर कुंज क्रीड़ा मैदान में ‘विधायक कप रात्रिकालीन फुटबॉल प्रतियोगिता 2026’ का समापन तो हो गया, लेकिन पीछे छोड़ गया बदइंतजामी, पैसों की फिजूलखर्ची और सत्ता के नशे में चूर नेताओं की चाटुकारिता का बदबूदार कीचड़।
पानी से लबालब ग्राउंड और बेहाल आयोजक
जिस मैदान पर खिलाड़ी दौड़ रहे थे, वह फुटबॉल का ग्राउंड कम और पोखरा ज्यादा नजर आ रहा था। जलजमाव और बदहाली के बीच खिलाड़ियों को ढकेल दिया गया। रात में फुटबॉल कराने का तुक किसी को समझ नहीं आया, लेकिन जब मकसद खेल को बढ़ावा देना नहीं बल्कि राजनीति चमकाना हो, तो ऐसी बेवकूफियों पर सवाल उठाना भी बेकार है। आयोजकों की नाकामी का आलम यह था कि लाख कोशिशों के बावजूद ग्राउंड की बदहाली छिप नहीं सकी।
विज्ञापनों पर लुटाए लाखों, लेकिन व्यवस्था ‘जीरो’
प्रतियोगिता के नाम पर लाखों रुपए सिर्फ बैनर, फ्लेक्स और होर्डिंग्स पर फूंक दिए गए। सवाल यह उठता है कि जब धरातल पर शून्य इंतजाम थे, तो जनता के पैसों का यह फिजूल खर्च आखिर किसकी जेब भरने के लिए हुआ? आयोजन समिति सिर्फ विधायक और महापौर की चाटुकारिता में लीन दिखी। हद तो तब हो गई जब सत्ता की चापलूसी के चक्कर में प्रोटोकॉल की सारी हदें पार कर दी गईं और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की तस्वीर तक के सम्मान का ख्याल नहीं रखा गया। चाटुकारिता के अति उत्साह में मुख्यमंत्री के पद और गरिमा का खुला अपमान हुआ।
औपचारिकता निभाने पहुँचे स्वास्थ्य मंत्री
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुँचे स्थानीय विधायक और प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल तथा विशिष्ट अतिथि महापौर राम नरेश राय केवल औपचारिकता (फॉर्मेलिटी) पूरी करते नजर आए। विजेता शारदा इलेवन (21 हजार रुपए व ट्रॉफी) और उपविजेता फुटबॉल क्लब चिरमिरी (15 हजार रुपए व ट्रॉफी) को इनाम बांटकर मंत्री जी अपनी पीठ थपथपाते रहे। लेकिन हकीकत यह है कि यह पूरा प्रपंच केवल उनके गिरते जनाधार को तिनके का सहारा देने की नाकाम कोशिश मात्र है।
अस्पतालों में दवाएं नहीं, पर ‘विधायक कप’ का जश्न जारी है!
समूचे छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाएं दम तोड़ रही हैं। अमानक और घटिया दवाओं के सैंपल लगातार फेल हो रहे हैं। सरकारी अस्पतालों से मरीजों को टका सा जवाब देकर मेडिकल स्टोर से महंगी दवाइयां खरीदने पर मजबूर किया जा रहा है। विडंबना देखिए कि जिस स्वास्थ्य मंत्री के अपने गृह ग्राम के अस्पतालों में बुनियादी दवाएं तक मयस्सर नहीं हैं, वे मंत्री जी अपनी छवि चमकाने और राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए रात में फुटबॉल मैच का ढोंग रच रहे हैं।
राजनीतिक रोटियां सेकने और चुनावी गोटी फिट करने के लिए खेल के मैदान को चाटुकारिता की मंडी बना दिया गया। जनता अब पूछ रही है कि जब प्रदेश के अस्पताल खुद ‘बीमार’ हैं, तो स्वास्थ्य मंत्री जी मैदान पर अपनी सियासी सेहत सुधारने का यह पाखंड कब तक बंद करेंगे?