आयशा अपार्टमेंट में हाजी साहबों का पुरख़ुलूस इस्तक़बाल, दुआओं और मोहब्बत से महका पूरा माहौल

हज-ए-बैतुल्लाह की मुक़द्दस सआदत हासिल कर लौटे हाजी साहबों के इस्तक़बाल में आयशा अपार्टमेंट उस वक़्त रूहानियत, मोहब्बत और दुआओं की ख़ुशबू से महक उठा, जब जनाब रियाज़ साहब की मेज़बानी में आयोजित पुरख़ुलूस समारोह में हाजी अब्दुल मुईद खान, डॉ. खलील मंसूरी सहित सभी हाजी साहबों का दिली इस्तक़बाल किया गया। इस गरिमामयी महफ़िल में जिला न्यायाधीश हिदायतुल्ला खान की शिरकत ने समारोह की वक़ार और रौनक़ को चार चाँद लगा दिए। उन्होंने हज के पाक़ीज़ा पैग़ाम—अमन, इंसानी बराबरी, ख़िदमत, मोहब्बत और कौमी यकजहती—को समाज की सबसे बड़ी ज़रूरत बताते हुए आपसी भाईचारे और सामाजिक सद्भाव को मज़बूत करने का आह्वान किया। दुआओं, मुबारकबाद और ख़ुलूस से सराबोर यह आयोजन रूहानी एहसास, इंसानी रिश्तों की गर्माहट और सामाजिक सौहार्द का यादगार मंज़र बन गया।

भोपाल (दैनिक जय संगवारी )आयशा अपार्टमेंट में जनाब रियाज़ साहब के निवास पर पवित्र हज यात्रा से लौटे हाजी अब्दुल मुईद खान और नेत्र विशेषज्ञ डॉक्टर खलील मंसूरी सहित सभी हाजी साहबों के सम्मान में एक अत्यंत गरिमामय, रूहानी और आत्मीय इस्तक़बाल समारोह आयोजित किया गया। पूरे आयोजन में मोहब्बत, भाईचारे, अदब और दुआओं की ऐसी फ़िज़ा कायम रही जिसने उपस्थित सभी लोगों के दिलों को छू लिया।
समारोह का आग़ाज़ हाजी साहबों की गुलपोशी, इस्तक़बाल और दिली मुबारकबाद के साथ हुआ।
इस अवसर पर जिला न्यायाधीश जनाब हिदायत उल्ला खान की गरिमामयी उपस्थिति समारोह का विशेष आकर्षण रही। उन्होंने हाजी साहबों को मुबारकबाद पेश करते हुए कहा कि हज हमें यह पैग़ाम देता है कि इंसान अपनी ज़िंदगी में मोहब्बत, अमन, सेवा और इंसानी बराबरी के उसूलों को अपनाकर समाज को बेहतर और सौहार्दपूर्ण बना सकता है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में आपसी सद्भाव, सामाजिक एकता और इंसानी रिश्तों को मज़बूत करना हम सभी की साझा ज़िम्मेदारी है।


समारोह में जनाब नावेद अंसारी, युसूफ कुरैशी, जफ़र इक़बाल ख़ान, अब्दुल शरीफ़ सहित अनेक गणमान्य नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति रही। सभी ने हाजी साहबों से मुलाक़ात कर उन्हें दिली मुबारकबाद पेश की तथा उनसे अपने परिवारों, समाज और पूरे मुल्क की सलामती, अमन-ओ-अमान, तरक़्क़ी, खुशहाली और इंसानी भाईचारे की मजबूती के लिए ख़ास दुआ की दरख़्वास्त की।


कार्यक्रम का समापन सामूहिक दावत और दुआ के साथ हुआ, जिसमें मुल्क की तरक़्क़ी, कौमी यकजहती, सामाजिक सद्भाव, इंसानी भाईचारे और पूरी दुनिया में अमन-ओ-सुकून कायम रहने की दुआ माँगी गई। इस अवसर पर मेज़बान जनाब रियाज़ साहब ने सभी मेहमानों के प्रति तहेदिल से आभार व्यक्त किया।

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