
अमन, सलामती और भाईचारे की दुआओं से महका धनपुरी का माहौल
✍️ अतीक खान बाबा
धनपुरी(दैनिक जय संगवारी)मुक़द्दस सरज़मीने-हरमैन से हज-ए-बैतुल्लाह की अज़ीम और रूहानी सआदत हासिल कर अब हाजियों का क़ाफ़िला अपने प्यारे वतन भारत लौट रहा है। इसी कड़ी में धनपुरी नगर के सम्मानित एवं धार्मिक प्रवृत्ति के व्यक्तित्व हाजी जनाब मोहम्मद शाबिर साहब भी हज के तमाम अरकान मुकम्मल कर आज जबलपुर–अंबिकापुर ट्रेन के माध्यम से अपने नगर धनपुरी लौट रहे हैं। उनकी आमद की ख़बर से नगरवासियों, रिश्तेदारों, अज़ीज़ों और अहबाब में ख़ुशी की लहर दौड़ गई है तथा हर कोई उनके इस्तक़बाल और उनसे दुआएँ लेने के लिए बेसब्री से इंतज़ार कर रहा है।
हाजी मोहम्मद शाबिर साहब, नगर के जाने-माने पत्रकार जनाब मोहम्मद शकील साहब के वालिद हैं। धनपुरी के कच्छी मोहल्ला, मदीना जामा मस्जिद के सामने स्थित उनका निवास हमेशा से दीन, तहज़ीब, इबादत और इंसानियत की ख़ुशबू से महकता रहा है। उनका पूरा परिवार नमाज़ का पाबंद, नेक अख़लाक़ और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक माना जाता है। एसईसीएल के पूर्व कर्मी रहे हाजी मोहम्मद शाबिर साहब ने सेवा निवृत्ति के बाद अपना अधिकतर समय इबादत, समाज सेवा और दीन की ख़िदमत में समर्पित कर दिया। पहले उन्होंने उमरा की मुक़द्दस सआदत हासिल की और इस वर्ष अल्लाह तआला के फ़ज़्ल-ओ-करम से हज की महान नेमत भी नसीब हुई।
हज इस्लाम का पाँचवाँ बुनियादी स्तंभ है। यह केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि सब्र, त्याग, समानता, आत्मशुद्धि और अल्लाह के प्रति सम्पूर्ण समर्पण का जीवंत संदेश है। हाजी मोहम्मद शाबिर साहब ने मक्का मुकर्रमा और मदीना मुनव्वरा की पाक सरज़मीन पर हज के सभी अरकान पूरी अकीदत के साथ अदा किए। उन्होंने एहराम बाँधा, काबा शरीफ़ का तवाफ़ किया, सफ़ा और मरवा के बीच सई की, अरफ़ात के मैदान में वक़ूफ़ किया, मुज़दलिफ़ा में रात गुज़ारी, मिना में रमी-जमरात कर शैतान को कंकरी मारी तथा क़ुर्बानी के बाद तवाफ़-ए-ज़ियारत सहित हज के तमाम फ़र्ज़ और वाजिब अरकान मुकम्मल किए। इन मुक़द्दस इबादतों के दौरान उन्होंने अपने गुनाहों की मग़फ़िरत के साथ-साथ मुल्क, क़ौम और पूरी इंसानियत की भलाई की ख़ास दुआएँ कीं।
बताया गया कि हाजी मोहम्मद शाबिर साहब ने ख़ुसूसी तौर पर अपने प्यारे वतन भारत की तरक़्क़ी, अमन-ओ-अमान, आपसी मोहब्बत, भाईचारे, सामाजिक सद्भाव, खुशहाली और हर नागरिक की सलामती के लिए रब्बुल आलमीन के हुज़ूर हाथ उठाकर दुआ की। उन्होंने देश में प्रेम, इंसानियत, एकता और धार्मिक सौहार्द हमेशा क़ायम रहने की भी दुआ माँगी।
धनपुरी नगर के लोगों का कहना है कि हाजी मोहम्मद शाबिर साहब का जीवन सादगी, विनम्रता, नेकनीयती और परहेज़गारी की मिसाल है। वे हमेशा लोगों को इंसानियत, मोहब्बत और भाईचारे का पैग़ाम देते रहे हैं। उनके हज से लौटने पर नगर में एक रूहानी माहौल देखने को मिल रहा है। हर कोई उन्हें मुबारकबाद देने और उनकी मुबारक दुआओं में शामिल होने के लिए उत्साहित है।
नगरवासियों का मानना है कि हज से लौटने वाले हाजी अपने साथ केवल ज़मज़म का पानी, खजूर और तस्बीह ही नहीं लाते, बल्कि अपने साथ दुआओं की वह बरकत भी लाते हैं जो पूरे समाज के लिए रहमत का सबब बनती है। हाजी मोहम्मद शाबिर साहब की यह रूहानी यात्रा निश्चित रूप से धनपुरी नगर के लिए फ़ख़्र, प्रेरणा और आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत बनेगी। उनके इस्तक़बाल की तैयारियाँ पूरे उत्साह और अकीदत के साथ की जा रही हैं तथा नगरवासी उन्हें “हाजी साहब” के सम्मानित संबोधन के साथ दिली मुबारकबाद देने के लिए आतुर हैं।